कोयल
Koyal
पंचम स्वर मा ते मधुर गीत,
कोयल ! के कुण छे गाणी?
राग-विराग, अनुराग विरहिणी !
कै तै छे तू दर्द बताणी?
उदात्त सच्चरित्र तै भि,
कब-कैन इख पैछाणी?
सक-सन्देह, डाह-ज्वाल-जलित,
बेदर्द हवा छ अब आणी।
अपण छन अपणुं से दूर।
प्यार-प्रतिमा हूंणी चूर ॥










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