कुंदु की पुकार 
Kundu ki Pukar



नौनक व्या मा फड़ पकाई। सर्रा गाँव त भात खलाई । 

कुंदुन अपणू पुटुगू मंजाई । भात खणिकु पुंगड़ मा आई ।


बामण मुट्ठिन भात र धन्नू, कुदु डुकरिक रै उख बुन्नू

भो बामण ! तू यु क्य छे कन्नू ? अज्वलिन क्य छ भात धन्नू। 


सामणी परन तै बिल वा उठा दी, म्यारु पातुल मा भात फैला दी, 

व्याक छ त्यारू नानक हूँण, अर भात क्य छे त् मनि दोण ?