करम गति टारे नहिं टरै
एक बार एक व्यक्ति गुरु नानक के पास आया और उसने कहा कि वह किसी महात्मा की संगति करना चाहता है, इसलिए वे किसी योग्य महात्मा का नाम बताएँ। गुरु नानक ने उसे लालो बढ़ई के पास भेज दिया।
वह व्यक्ति जब लालो के पास गया, तो उसे यह दिखाई दिया कि वह चारपाई के पायों की सीढ़ी बना रहा है और अंतिम संस्कार का सामान पास में ही पड़ा हुआ है। उस व्यक्ति को आश्चर्य हुआ कि यह व्यक्ति महात्मा कैसे हो सकता है? उसने जिज्ञासावश लालो से पूछा कि किसके अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है, तब लालो ने बताया कि उसके लड़के के शरीर पर से गाड़ी का पहिया चल जाने से उसकी मृत्यु हो गई है।"
"ऐसा कैसे हो गया?” उस व्यक्ति ने प्रश्न किया। लालो ने जवाब दिया, “जो भाग्य में लिखा है, वही होता है। शायद सद्गुरु की यही मर्जी थी।"
"यह तो बहुत बुरा हुआ।" वह व्यक्ति बोला-
“बुरा हुआ होगा, लेकिन सद्गुरु की यही इच्छा थी। अब देखो न, मुझे ऐसा प्रतीत रहा है कि सद्गुरु की इच्छा से आज के आठवें दिन तुम्हें फाँसी पर चढ़ाया जाएगा।"
उस व्यक्ति ने जब यह सुना, तो बेहद घबरा गया और डर के मारे सातवें दिन जंगल की ओर रवाना हो गया। रास्ते में जब उसे नींद आने लगी, तो वह एक पेड़ के नीचे जाकर सो गया। संयोग से वहाँ कुछ चोर आए और चोरी का माल आपस में बाँटने लगे। जब केवल एक माला बची, तो उसे इस व्यक्ति के गले में डालकर भाग गए। थोड़ी ही देर में चोरों का पीछा करते हुए वहाँ कुछ सिपाही आए तथा चोरी की माला उस व्यक्ति के गले में देख उसे चोर समझ पकड़ ले गए। राजा ने भी जब चोरी की माला देखी, तो उसे फाँसी की सजा सुना दी।
उस व्यक्ति से जब उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई, तो उसने लालो बढ़ई से मिलने की इच्छा व्यक्त की। उसे जब लालो के पास ले जाया गया, तो उसने उसके पैर पकड़े और फाँसी से बचाने के लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। तब लालो ने उससे कहा, “देखा, भाग्य में जैसा लिखा रहता है, वैसा होता है या नहीं? अब तो गुरुनानक साहब का स्मरण करो। यदि उनकी मर्जी होगी, तो बच जाओगे ।”
उस व्यक्ति ने नानकदेव का स्मरण किया और थोड़ी ही देर में खबर आई कि असली चोर पकड़े गए हैं और उन्होंने यह कबूल कर लिया है कि एक माला उन्होंने पेड़ के नीचे सोये व्यक्ति के गले में डाल दी थी। राजा ने सुना, तो उस व्यक्ति को रिहा कर दिया। उसे प्रतीत हो गया कि भाग्य में जो लिखा होता है, वह होकर रहता है। उसे लालो के भी प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई तथा उसने उनके साथ सत्संग करना शुरू किया।










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