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Hindi Essay on "Cow", "गाय" Complete Speech-Paragraph for class 5, 6, 7, 8, 9, and 10 students in Hindi Language

गाय 

Cow

निबंध नंबर:- 01
गाय एक घरेलू पशु है इसे भारत के लोग माँ के समान मानते हैं।
भारत देश में प्राचीन समय से अब तक गाय को पूजनीय
व उपयोगी पशु माना जाता है। गाय आकार में छोटी, बड़ी, विभिन्न रंगों की, कई प्रकार की होती हैं। गाय के चार पैर दो सींग व ऐक लम्बी पूँछ होती है। गाय कई रंगों में पाई जाती है जैसे-काली, सफेद, भुरी तथा चितकबरी। इसके चार थन होते हैं। गाय विशेष रूप से  शाकाहारी पशु है। यह घास, दाना, अनाज, रोटी व भूसा खाती है। गाय बहुत सीधी होती है यह कभी भी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाती। यह बहुत ही शांतिप्रिय पशु है। गाय हमें दूध देती है। इसका दुध मीठा और स्वादिष्ट होता है तथा इसका दूध जल्दी पचने के कारण विशेष रूप से बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसका दूध अन्य लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है तथा यह काफी काम में आता है। इससे विशेष रूप से घी, मक्खन, पनीर, खाया के प्रकार की मिठाइयाँ बनायी जाती हैं। गाय के बछड़े बैल कहलाते हैं जो कि खेतों में हल जोतने तथा सामान ढोने, बैलगाड़ी चलाने के कामों में आते हैं। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। इसका दूध पीने से बीमारी नहीं होती है। गाय एक बहुत सीधा और आदरणीय पशु है। इसका गोबर, मूत्र, दूधए सब कुछ पवित्र  माना जाता है। इसका गोबर उपले बनाने के काम आता है जिन्हें गाँव में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत में गाय को माँ माना जाता है इसलिए यहाँ गाय की पूजा की जाती है। अतः हम सबका कर्तव्य है कि हम इसकी रक्षा करें।

निबंध नंबर:- 02 
गाय 

गाय का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्त्व है। गाय का पूरी दुनिया में ही काफी महत्त्व है, लेकिन भारत में गाय को देवी का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है। गाय एक बहुत उपयोगी घरेलू पशु है। 


गाय न सिर्फ अपने जीवन में लोगों के लिए उपयोगी होती है वरन मरने के बाद भी उसके शरीर का हर अंग काम आता है। गाय का दूध बीमारों और बच्चों के लिए बेहद उपयोगी आहार माना जाता है। इसके अलावा दूध से कई तरह के पकवान बनते हैं। दूध से दही, पनीर, मक्खन और घी भी बनता है। गाय का घी और गोमूत्र अनेक आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के काम भी आता है। गाय का गोबर फसलों के लिए सबसे उत्तम खाद है। गाय के चमड़ा, सींग, खुर से दैनिक जीवनोपयोगी सामान तैयार होता है। गाय की हड्डिहयों से तैयार खाद खेती के काम आती है।

निबंध नंबर:- 03

पवित्र गाय 
Pavitra Gaye 

भारत में बलवान वृषभ हों, बोझ उठाएँ भारी।अश्व बनें अनुगामी , दुर्गम पथ में विचरणकारी।जिनकी गति अवलोक लजाकर,हो समीर भी हारा।सब साधन से रहे समुन्नत भारत देश हमारा।

भारत देश में गाय का महत्त्व प्राचीन काल से ही रहा है।भगवान श्री कृष्ण का ग्वाला बनकर गायों को चराना, वशिष्ठ जी की कामधेनु गाय,जिसके ऊपर संग्राम तक हुआ था, भगवान श्री राम के पूर्वज राजा दिलीप की गौ- सेवा के बारे में सभी लोग जानते है। मुहम्मद गौरी ने भारतीयों की गाय के प्रति ऐसी आस्था को देखकर ही गायों का झुण्ड अपनी दुश्मन की सेना के सामने रखा था। सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख कारण भी गाय की चर्बी से बने कारतूस का प्रयोग करना था। गौ-पालन का उद्देश्य दूध प्राप्त करना है कि एक सबसे अच्छा पेय है। स्वास्थ्य के लिए इससे अच्छा अन्य कोई साधन नही है। इसके बछड़े अपने कन्धों के बल से खेेतों को जोतते है। तथा इनका उपयोग भारी बोझो को गाड़ीे के द्वारा एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जाता है।इसके गोबर को उपले बनाने, खेतों में खाद डालने तथा कच्चे घरों की दिवारों तथा फर्शों को लीपने के लिए किया जाता है।



गाय का इतना धार्मिक एवं आर्थिक महत्त्व होने पर भी वर्तमान में गाय के प्रति मानव-जाति का व्यवहार अच्छा नही है।गाय जब वृद्ध हो जाती है तो हम कुछ पैसों के लिए उसे वधकर्ताओं को बेच देते है। जब तक दूध तब तक आसके अनुसार हम उसकी सेवा करते है। लेकिन दूध न देने पर हम उसकी तरफ ध्यान भी नही देते। गाय को मारना-पीटना, समय पर चारा न डालन तथा उसके स्वास्थ्य के बारे में फिक्र न करना हमारे लिए शर्म की बात है। गाय के मरने के बाद उससे चमड़ा प्राप्त किया जाता है।जिससे जूते, हैण्ड बैग और कई प्रकार की सामग्रियाँ बनाई जाती है।विदेशों में हजारों गाये मांस और दूध के लिए काटी जाती है। हमारा कत्र्तव्य है कि अपने पूर्वजों की तरह हम भी गाय का आदर करें तथा उसके जीवन की रक्षा करें।गायों को पालकर और उसका दूध पीकर हम शक्तिशाली बनें। गाय के साथ दुव्र्यवहार करने वालों को प्यार से समझाये। हर्ष की बात है कि हमारी प्रान्तीय सरकार कुछ दिनों गौ-वध पर प्रतिबन्ध लगा दिया है।आशा है कि भविष्य में गौ-वंश का उत्थान होगा।


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