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Pitaji ko apni shiksha jari rakhne hatu nivedan patra, "पिता जी से अपनी आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए निवेदन पत्र".


अपने पिता जी से अपनी आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए निवेदन पत्र लिखें।

20-बसन्त विहार
अमृतसर।
फरवरी 21, 20....

आदरणीय पिता जी,
पिछले हफ्ते मुझे आपका पत्र मिला। जिस से मैं बहुत दु:खी हो गया। आपने लिखा था कि मैं अपनी शिक्षा को छोड़ कर आपके साथ व्यापार करने में जुड़ जाऊं। आपके अनुसार मैं अपना समय तथा ताकत व्यर्थ गवां रहा हूँ।

प्यारे पिता जी, मैं आपके विचारों से सहमत नहीं हूँ। इसमें कोई शक नहीं है कि मुझे आपके व्यापार में शामिल होना है, परन्तु एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति अच्छा व्यापारी बन सकता है। एक व्यापारी को कई उच्च अधिकारियों से मिलना पड़ता है। उसे बड़ी-बड़ी फर्मों के अफसरों से लेन-देन करना पड़ता है। एक पड़ा लिखा व्यापारी ही यह काम अच्छे से कर सकता है।

इसलिए मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि मुझे कम से कम अपनी बी.काम पूर्ण करने की इजाजत दे दीजिए। कृपया आप अपने फैसले पर पुनः विचार करें।
आदर सहित।

आपका प्रिय पुत्र,
जोगिंद्र सिंह।



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