आरक्षण 
Aarakshan 



हम ते क्य मालुम छ्याई कि-

ये लोकतंत्रक इतिहास मा 

कभि इन वक्त बि आल कि-

आरक्षणक विरोध अर अलग राज्यक वास्ता, 

उत्तराखंडक आबालवृद्ध, 

हथ्थ लहराद, नारा लगाँद सड़क पर ऐ जाल, 

अर उखकि पुलिस, ऊँकि बेटी-ब्वायूंक दगड़, 

विजित दुस्मक औरतुक तरां, सामूहिक बलात्कार करल । 

इखक नेता, साधु, सांसद अर समाज सेवकू कुण, 

ये नचूक देश मा, 

क्य चुल्लुभर पाणी भि नि रै ग्या मन्न कुण, 

जु अपण वोट अर कुर्सी बचाण कू अथवा हथियाण कू, 

सांप बणीक रै गेन । 

यूं तै जब दुसरि चाल चन्न कू नि मीलि, 

त यी उत्तराखंड से बलि क बकरा बनैक खै गेन,

जरा याखोदी, सब तरफ़ क्य हाहाकार-चीत्कार छ,

ब्वे-बाप, रिस्तादार, दहाड़ मारिक रुण छन, 

अर यो समाजक ठिक्यदार, 

न जाणी कख दुम दबक सियाँ छन । 

आज त यं चिल यो उत्तराखंडी, भौत भारी हवे गेन । 

यूंक बल-बुद्धि अर बलिदानन, 

सि विचार त, यं चिल वि निखद रै गन