बड़क डालु
Badak Dalu



जरात बड़क डाल त द्याखोदी! 

तैकू आस्रय मा, 

हल्य-ग्वेरुन, बाट-बटोयून, पसु-पक्ष्यून, 

झुलसाँद दुफराकि, 

अर सौंण-भादौंक बरखाकि, 

कबि परबा नि करी, 

तैक लम्बू बौंल अर चुप्पा पकड़िक

न जणी कतगा लोग, 

टुक्ख मा चड़ी गेन, 

अर स्यु बिचारु, 

उन्यक उन्नि, 

गुमसुम बणिक, 

जन्यक तन्नि, 

तक्किम बैठ्यं छ। 

या दुनिया कतगा निर्दै हवे ग्याई! 

क्वो तक गिच्च पर, 

रुट्टिक गफ्फा कुचणकु भि नि आँद !

 निथर यु भि एक न एक दिन 

जरूर उब उठि जाँद !