चोरक दाड़ी मा तिनका
Choraki Dadi Ma Tinka
विक्रमादित्य त कै सभा मा—
चोर पकड़न छ्याई।
थाणदारन वेक आज्ञा से कड़किक ब्वालि—
मी जाणदू छौं चोर कवा छ ?
मी वे ते साफ दिखणू छौं ।
वेन फिर लोगुक तरफ देखिक ब्वालि—
तुम भि द्याखो—
चोरक दाड़ी मा तिनका छ ।
इन सूणिक चोर घबराई.।
वेन झट-पट दाड़ी पर हथ्थ लगाई,
थाणेदारन झट से चोर पछाणी ल्याई।
अर वे तै जेल भिजवै द्याई ।
लेकिन दोस्तो!
अब या समस्या बड़ी विकट छ ।
आजक सभा मा सब चोर छन,
सब्बुक दाड़ी मा तिनका छ,
थाणेदार कतगा भि कड़किक ब्वालू—
फिर भि क्वी अपणी दाड़ी पर हथ्थ नि लगाँद,
अब त इख डाकू भि अफ तै सन्त बताँद !










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