बेईमानी
Baimani
बढ़ि ग्याई दुनिया मा बेईमानी।
लोकतंत्रक नारा देक, नेता करदन मनमानी ।
मन्दिर-मस्जिद, गुरुद्वारा मा बैठ्याँ छन अज्ञानी।
धर्म-कर्मक मर्म नि जाँणद, गमराह करदन सैतानी।
तब बंदूक-पिस्तौल चल्दन खून बगद जनु पाणी ।
कैक खातिर लुटद लोगुक बेसकीमतौ जवानी।
कैक बल पर टिकी छ या अपणी धरती राणी,
पद, प्रान्त, धन-दौलत द्याखी आदिम कैन पछाणी?
काम करो मित्रो ! कुछ इन, जैसे धरती हाऊ कल्याणी ।










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