जय दुर्गे दुर्गतिनासिणी !
Jay Durge Durganasini
जय दुर्गदुर्गतिनासिणी!
गढ़वाल हिमालय की कन्या, सकल विस्वव्यापिणी ।
महिसासुर संहारिणी, चंड-मुड विघातिणी।
तू रक्तबीजरक्तपा, असुरवस विनासिणी।
दिवतों को सक्ति-पूंज, सुख-सौभाग्यदायिणी।
सब मांगल्यकारिणी, दुःखदारिद्र यहारिणी।
भवतारिणी, उद्धारिणी, अखिल विस्व आराधिणी।
वरदहस्त उठक बोल-'मी छौं तेरी हितकारिणो' ।










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