गढ़भूमि के नाम  
Garhbhumi Ke Naam



'काफल पाको, 

सब्बुन चाखो, 

मीन नि चाखो,

य विवसताक स्वर, 

सदानि जख गंज राई, 

वीं धरती ते म्य।रू प्रणाम। 

ज्वा भूमि सैकड़ों नदी निझरू तै

अविरल प्रवाहित कन्नी छ, 

फिर भि जैक पपोहा-तापस, 

रात-दिन अनथक वाणो मा बन्न छन-

सर्ग ददा! पाणी-पाणी', 

ऊँ एकनिस्ठ स्वाति-पिपासू तै, 

म्यारू सलाम। 

हे गढ़पुत्रो ! जख भि तुम छ्याऊ, 

सहरु मा, पाडू मा, 

सिर्फ एक बार, 

पढ़ी सकदवा, त पढ़ी ल्याऊ, 

सूणी सकदवा, त सूणी ल्याऊ, 

विराग भर्या, राग भाँ, आग भर्या

यू महस्यूंक कलाम, 

अलका पर सदावत, 

मेघदूत कू पंगाम, 

गढ़भूमि कू नाम।