दिल कू दुःख
Dil Ku Dukh
दिल क दुःख सब दिल मा ही हम सै ग्यवाँ,
हम भलु करीक भि इनि रै ग्यवाँ ।
कबि त आल दिन हमार बौडिक,
आज भ्वालु करीक इनि रै ग्यवाँ ।
जख भि ग्यवाँ अपण लोगुक बीच मा,
उखि हम परदेसी बणीक रै ग्यबाँ।
रस्ता बणाई जू बि हमन सोचिक,
हर रस्ता रोकिक क्वी न क्वी छ्या खड़ हुयाँ ।
दिल क दुःख सब दिल मा ही हम सै ग्यवाँ।










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