नै गंगा
Ne Ganga
अपणी कलमन अफ त सँवारि आलि मीन,
अपण गीत मा दिल कू बोझ उतारि आलि मीन ।
यों दुनियक इच्छा छ कि मरि जो मी घुटि-घुटिक,
अब त हर तरह से दुर्दैव भि दुत्कारि आलि मीन ।
हिमालय से भि बड़ी ह.वे गे छ पोड़ा मेरी,
वे हिमालय से नै गंगा निकालि आई मीन ।










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