एक हवे जावा, हम एक छवाँ 
Ek Huwe Java, Hum Ek Chavan



एक हव जावा, हम एक छवाँ। 

हम एक छवाँ, अर एक रौला। 

आज उत्तराखंड खतर, मा छ । 

तुम कदम मिलैक बढ़ावा। 

एक ह वे जावा, हम एक छवाँ । 

सीखी नि अब-तक हमन खतरों से घबराँण । 

खेल समझी अब-तक हमन तूफान से टकराँण ।

जै मान द्याई जन्म, वींक लाज बचावा। 

एक हवे जावा, हम एक छा। आज उत्तराखंड खतरामा छ । 


तुम कदम मिलक बढ़ावा। 

क्वी जालिम जुल्मक वास्ता सरण उख तिनऊ। 

क्वी सैतान वीं धरती मा खुट नि रख पाऊ। 

सराब-कबाब, तास-तम्बाकू मा ना वक्त गंवावा। 

एक ह वे जावा, हम एक छवाँ । 

आज उत्तराखंड खतरा मा छ । 

तुम कदम मिलैक बढ़ावा। 

क्य गढ़वाल ? क्य कुमायूँ ? 

क्य देहरादूनक वासी। 

दूर-दूर से अयाँ सबि हम उत्तराखंडक वासी। 

गंगा-यमुना अर सरस्वति , 

तुम संगम बणी जावा। 

एक ह वे जावा, हम एक छवाँ ।' 

आज उत्तराखंड खतरा मा छ । 

तुम कदम मिलक बढ़ावा । 

एक हवे जावा, हम एक छवाँ।