परदेसी
Pardesi
म्यारू परदेसी क्य बात हवाई ?
क्यो कू क्वी चिठ्ठी-पत्री नि द्याई ?
कबि ना कबि त मीत याद करदू।
वैसे मी जीणक हिम्मत भरदू।
आस लगैक मी बैट्यू रै ग्यों।
इखुली पीड़ा चुपचाप सै ग्यों।
क्य गल्ती मी से इनि होई ग्याई ?
अपणु स्वामी ज परदेसी हवाई ?
स्वामी जी ! गुस्सा अब थूकी देन ।
अपणी दुनिया मा तुम सुखी रैन ।
घुघतिक स्वर मा स्वर यू मिलाई ।
अब त आस मा साँस भि ग्याई।
तेरी दुनिया अब छुडणू छौं त्वेकू
कभि आँसू ना बगै निर्दै तू मेकू ।










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