सुपिन 
Supin



सुपिनुक थकि गेन खुट्ट--

चल्द-चल्द । 


फिर भि मंजिल नि दिख्याई--

उमर ढल्द-ढल्द । 


मन-मृगतृष्णा बणिक र ग्याई--

मचल्द-मचल्द । 


दिल अब-तक कोयला हवे ग्याई--

जल्द-जल्द । 


यु अचाणचक कन झोंका आई--

कभि इना बिटिक, 

कभि उना बिटिक, 


कि हाय ! हरी-भरी डालि टुटि ग्याई--

फल्द-फल्द।