सिर्फ कर अपुण पोषणम्
Sirf Kar Apun Poshnam



काफ़ी हवे ग्याऊ तुम कर्मयोगी-धर्मयोगी

अब फंड फूका धर्म-कर्म पोषणम् । 

जीवन मा चार्वाक कू सिद्धान्त अपणावा,

खाबा-पिवा, मौज उड़ावा, 

क्वी बात दिल पर नि लगावा 

जनकैक भि हवाऊ, 

पुटग्यूंक आग बुझावा,

कर्ज करीक सराव प्यावा, 

दिबतौंक नौंक बाखर कटावा, 

परिवारक कर शोषणम्, 

अर अपणी पुटगिक पोषणम् । 

क्यो कू छ्याऊ तुम—

भितरि-भितर फुक्याण लग्याँ। 

सबेर बिटिक स्याम तक—

भटक्याण लग्याँ। 

सूणी नी छ तुमन—

'चिन्तां समं नास्ति शरीर शोषणम्' 

खावा-पिवा अर बढ़ावा मांस लोथणम् । 

सिर्फ अपना कर पोषणम् ।