टुपुलू 
Tupulu



कल्य ल्वार दजिम ग्याई, 

ल्वनिक गांठक धिला चुराई, 

वेन भि अपुर्णां बिगरौ दिखाई, 

टुपुलू बणाई भाई, टुपुलू बणाई।


टुपुलू उ वढूं बिटिकनि ध्वाई, 

मैलन वे पर पपड़ी जमाई, 

नाक टुट्टि, बदबू आई,

टुपुलू बणाई भाई, टुपुलू बणाई। 


बिरति मा जाणक वेन स्वाचो, 

अपुण टुपुलू मुंड मा राखी, 

ठाकुरुक घरन घर दद्याखी, 

खाणू-पीण सब्बुक चाखी।


गणक्यन वेन ढिबुरु ल्याई, 

वे ते लेक बस मा आई, 

कलेंडरन ढिबरक टिकट बणाई,

कल्यन वे तै रुप्य नि द्याई । 


ऊँ मा फिर तुड़म-तुड़ा ह्वाई, 

कल्यन ब्वालि-किल टिकट बणाई' ? 

'जानबरुक टिकट लगदु छ भाई', 

कलेंडरन वे तै य बात बताई।


वेन मुंड मान टुपुलू उठाई, 

वे तै वेक सामणी हिलाई 

जूंक भीम ढेर लगाई, 

कल्यन वे तै डांट पिलाई।


इ जानबर त्वे पर छन चणा, 

यूँ सब्बुक अब तू टिकट बणा, 

निथर अपणी खैर मणा, 

बाना मीत कमी ना सुणा।


सूण साब मा बोली द्यूलु। 

बंद-बंद सब खोली द्यूलु। 

भंडा त्यारू फोड़ी द्यूलु।

तेरी नौकरी तोड़ी द्यूलु। 


कलेंडरन वे तै सलाम लगाई, 

ढिबुरु वेकू छोड़ी द्याई, 

टोपिक कल्यन फिर भुक्कि प्याई, 

फिर भि टुसुलू कभि नि ध्वाई।