किताब
Kitab
आज तक कतना दु:ख दिखिन ?
क्वी हिसाब नी छ।
मेरी जिदगिक हर पन्ना बिखयूं छ,
क्वी किताब नी छ।
खूब सम्भालिक धर्या रैन इ पन्ना,
त्यार बि क्वी जवाब नो छ ।
सुचुणूं छौं त्यार छूण से ही यु ग्रंथ,
इतना सूबसूरत ह वे ग्याई।
सैद मेरी यी किताब ते,
त्यार घरक जरूर क्वी किनारु मीलि ग्याई,
जन गंगोत्रिक गंगा तै, समुद्रक सहारु मीलि ग्याई










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