या छ हमरी हूणी-खाणी
Ya Cha Hamri Huni-Khani



काम हमर हल लगाणी, 

फिर बिनी छ रासन-पाणी। 

धन-दौलत स्या हमरी दिख्याणी, 

घास-लाखुडू गदनुक पाणी। 

या छ हमरी हूणी खाणी ।।


कटल खणिक झंग्वारू बूण । 

बल्दक मूतन स्यारू लगौंण। 

बिस्यरि उठिक पुंगण जाण । 

पीण कू नी छ उख पाणी।

या छ हमरी हणी-खाणी। 


नौन हुंदन गणिक बारह । 

वसभर खांदन सिर हमार। 

झगुलि-टुपलि कम नी छ । 

पसा पाई ब्वम नी छ । 

चाय पिदवाँ हम गुड़क पाणी। 

या छ हमरी हणी-खाणी।।


गथ्वाड़ हमर गूणी लग्याँ छन । 

सठ्याड़ सर्रा सुगर लग्याँ छन । 

रिक्कुन पुगड्यूक मुंगरी चबैन । 

आल्लु-प्याज बाँदुरुन खैन । 

र ग्या सासू ध लगाणी।।

या छ हमरी हूणी-खाणी ।।


दाबिली पर भितर मूस लग्याँ छन । 

नौन-बाल भूतक डाँ छन । 

जग-जगा ऊँ पर उप्पन चिपक्या छन । 

सबेर उकि जब द्याखी मीन । 

कूड़िक पठाल सबि उड्याँ छन । 

क्य-क्य चुच या बात बताणी। 

या छ हमरो हूणो-खाणी।


कूड़ी मेरी तप-तप चूंणी। 

ब्वारी रँद सासु कू रूणी। 

हरी-भरी ब्वालो कनकैक हणी। 

मेस न रैंद यूराणी-जठाणी। 

लड़द रैदन पुंगड्यूक बानी। 

या छ हमरी हुणी-खाणी॥


सौंणक मैना जब पड़दू पाणी। 

रैदी ब्वारी गारू-माटु उठाणो। 

धनकुर ऐ गेन करन कू धाणी। 

लाड़िकि कटगलि मा पडिगे पाणी। 

पकाँणकु नी छ चौंलुकि दाणी। 

या छ हमरी हूणी-खाणी।


बल्दक म्यारू सिंग टुट्यू छ । 

सन्नि दिख्याऊ सर्रा उजड़ी छ । 

माँ म नी छ धोती पूरी। 

बाबा कू कुर्ता सर्रा फट्यू छ । 

ऐथर तुम तै क्यो कू सुणाणी। 

या छ हमरी हूणी-खाणी ।।