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Hindi Essay on "Mere Padosi", "मेरे पड़ोसी" for Students, Complete Hindi Essay, Paragraph, Speech for class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 12 Exam.

मेरे पड़ोसी 
Mere Padosi



पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति हमारे पड़ोसी होते है। पड़ोस के लोग एक-दूसरे के सहायक होते है। खशी का अवसर हो चाहे दुख का पड़ोसी जितने काम आते है उतने दूर रहने वाले सगे संबंधी नहीं। हमें पड़ोसियों के साथ मधुर व्यवहार करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर पड़ोसियों को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।


मेरे घर के सामने वर्मा जी का परिवार रहता है। वर्मा जी किसी प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक है। वर्मा जी का पूरा परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का है। वर्मा जी एवं उनकी पत्नी रोज मंदिर जाते है। वर्मा जी का लड़का मेरे साथ पढ़ता है। हम दोनों अच्छे मित्र है। मै वर्मा जी के पास ट्यूशन पढ़ने जाता हूँ। वर्मा जी मुझे बहुत प्यार से पढ़ाते है। उनका हँसमुख स्वभाव पूरे मोहल्ले में प्रसिद्ध है। वे सभी के साथ बडी मीठी बोली में बातें करते है। मेरे तथा उनके परिवार के बीच खान पान और मित्रता का नाता है। 


मेरे घर के ठीक पीछे मुहम्मद सलीम जी का परिवार रहता है। हमारे छत सटे हुए है अतः प्रतिदिन ही सलीम जी के परिवार के सदस्यों से हमारी बातचीत होती है। सलीम जी एक दरजी है तथा शहर के मुख्य बाजार में उनकी दुकान है। हमारे घर के सभी कपड़े सलीम जी के दुकान में ही सिलते है। सलीम जी बड़े ही सच्चे व नेकदिल इंसान है। वे नियम से नमाज पढ़ते है। हम लोग जब भी उनकी दुकान पर जाते है वे बड़े प्रेम से बातें करते हैं तथा कुछ न कुछ खाने के लिए भी देते है। ईद के अवसर पर सभी पड़ोसियों की उनके घर विशेष दावत होती है। सलीम जी पड़ोसियों की सहायता के लिए हर समय तैयार रहते है। सलीम जी का बड़ा लड़का हॉकी का बहुत अच्छा खिलाड़ी है। उसके साथ मोहल्ले के बच्चे हॉकी खेलना सीखते है। 


मेरे घर की बाई ओर किशनदास जी का परिवार रहता है। किशनदास जी एक हटे-कट्रे व्यक्ति हैं। उसकी आवाज बडी रोबीली है तथा मँछे कड़ी-कड़ी है। ये पुलिस विभाग में हवलदार हैं। इनके कारण चार उचक्के हमारे महल्ले में घुसने की हिम्मत नहीं करते है। इनकी आवाज इतनी कड़कदार है कि अनजान बच्चे सुने तो डर जाएँ। परंतु दिल से ये एक नेक व्यक्ति है। इनका परिवार काफी बड़ा है जिसके कारण इनके घर में हमेशा चहल पहल बनी रहती है। इनके घर के बच्चे कभी-कभी आपस में इतना लड़ते है कि महाभारत का दृश्य उपस्थित हो जाता है। परंतु लड़ाई-झगड़ा हमेशा किशनदास जी की अनुपस्थिति में होता है। 


इस प्रकार मेरे अधिकतर पड़ोसी अच्छे है। अच्छे पड़ोसियों का होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमें पड़ोसियों के साथ मित्रता का व्यवहार रखना चाहिए।



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