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Hindi Essay, Nibandh on "Pradushan Niyantran Me Hamara Yogdan", "प्रदूषण नियंत्रण में हमारा योगदान " Complete Hindi Speech, Paragraph.

 हिंदी निबंध - प्रदूषण नियंत्रण में हमारा योगदान 
Pradushan Niyantran Me Hamara Yogdan


प्रदूषण का साधारण शब्दों में अर्थ है प्राकृतिक वातावरण का दूषित होना। अगर दूषित वातावरण हो, व्यक्ति का स्वास्थ खराब होता है। मानव तो छोड़ो पेड़ और पौधे तक दूषित हो जाते हैं। प्रदूषण के कई प्रकार हैं-जैसे ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, भू प्रदूषण आदि। प्रदूषण कई प्रकार से मानव को हानि पहुंचाता है। प्रदूषण पर अगर नियंत्रण नहीं किया जाता तो एक दिन पूरा देश बीमार हो जाएगा।

प्रदूषण के कई कारण हैं उनमें एक वृक्षों की अंधाधुंध कटाई किन्तु उनके स्थान पर नए वृक्षों का रोपण न करना। मनुष्य अपना भोजन और आवास की समस्या हल करने के लिए वक्षों की कटाई कर रहा है, पर नए वृक्षों का रोपण नहीं कर रहा है। अगर वह प्रदूषण पर नियंत्रण करना चाहता है तो उसे धरती को हरा-भरा बनाना होगा। यह काम उसे ही करना है। सरकार तो केवल मार्ग दर्शन कर सकती है अथवा इसके लिए आवश्यक आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है।

प्रदूषण का दूसरा प्रकार ध्वनि प्रदूषण है। व्यक्ति इसमें अपना योगदान दे सकता है। वह वैज्ञानिक सुविधा का फायदा उठा रहा है। भारी संख्या में मोटर गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन इसके कारण आने वाली आवाज उसे बहरा बना रही है। इन गाड़ियों से होने वाला शोर व्यक्ति के स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। वह कम गाड़ियों का इस्तेमाल कर और ध्वनि प्रदूषण रोकने वाले यंत्रों का इस्तेमाल कर इस तरह के प्रदूषण पर नियंत्रण कर सकता है।

वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए वह सी.एन.जी. गाड़ियों का इस्तेमाल कर सकता है। डीजल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों से दूर रह सकता है। वस्तुतः इनसे इतना धुआँ निकलता है जिससे वायु प्रदूषित होती है और व्यक्ति का साँस लेना कठिन हो जाता है। इसी तरह जल प्रदूषण से बचने का उपाय यह है कि हमें नदियों को साफ-सुथरा रखना होगा। इसमें कूड़ा कर्कट डालने से बचना होगा।

प्रदूषण नियंत्रण में हमारी भूमिका अग्रगण्य है। सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के अनेक उपाय किए जाते हैं। अगर हम उन उपायों को क्रियान्वित नहीं करेंगे तो उन उपायों का कोई असर नहीं पड़ेगा।

वस्तुतः प्रदूषण एक व्यक्ति विशेष के प्रयासों से नहीं रुकने वाला। इसके लिए जन आंदोलन छेड़ना होगा। इस काम में सरकार और समाज दोनों को जिम्मेदारी उठानी होगी। सरकार को चाहिए कि कल कारखानों की चिमनियाँ ऊँची कराने का आदेश दे ताकि जहरीला धुआँ मानव के स्वास्थ्य को हानि न पहुंचा सके। लेकिन यह भी तभी संभव है जब मानव जागरूक होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यक्ति को अधिक से अधिक न केवल वृक्षों का रोपण करना चाहिए बल्कि पेड़ों की सुरक्षा करनी चाहिए। उसे नदी-नालों पर कूड़ा नहीं फेंकना चाहिए। इससे जल स्वच्छ बना रहेगा। जल संरक्षण, वायु संरक्षण, ध्वनि संरक्षण के लिए व्यक्ति को सरकार की ओर से सुझाए उपायों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। स्वार्थ के लिए प्रदूषण दूषित नहीं करना चाहिए। तभी वातावरण दूषित होने से बच सकता है।




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