भय ते भगति सब करें



एक बार ईसा कहीं जा रहे थे कि रास्ते में उन्हें तीन दुबले-पतले व्यक्ति दिखाई दिए। ईसा ने उनसे प्रश्न किया, “तुम्हारी यह हालत कैसे हो गई?" उन्होंने उत्तर दिया, “आग के डर से।" ईसा बोले, “बड़े अचरज की बात है कि तुम प्रभु द्वारा उत्पन्न की गई वस्तु से डरते हो। परमात्मा डरने वालों को बचाता जरूर है, लेकिन डरना छोड़ दो और बेहिचक भगवद्भजन करो।”

वे जब आगे बढ़े तो उन्हें तीन व्यक्ति और दिखाई दिए, जो पहले मिले व्यक्तियों से भी अधिक दुबले थे और उनके चेहरे पीले पड़ गए थे। ईसा ने उनसे भी उनकी दशा का कारण पूछा। “स्वर्ग की कामना के कारण।” ईसा बोले, उन्होंने जवाब दिया, “भगवान् का भजन-पूजन जारी रखो ! वह तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी करेगा, क्योंकि तुम उसके द्वारा निर्मित वस्तु की इच्छा कर रहे हो।"

आगे चलने पर उन्हें तीन दुर्बल व्यक्ति दिखे, लेकिन उनके चेहरे उन्हें दीप्तिमान दिखाई दिए। ईसा ने पूछा, “तुम्हें किस बात का भय है, जो तुमने ऐसी हालत बना रखी है?” उन्होंने उत्तर दिया, "प्रभु के प्रति प्रेम के कारण।" ईसा बोले, “तुम उसके निकट हो, बहुत निकट । ईश्वर तुम्हें अवश्य मिलेंगे। तुम भय करना छोड़ो, क्योंकि जो भय की भावना से ईश्वर की भक्ति करता है, उसमें निराशा और असहायता के भाव उत्पन्न होते हैं। इससे भक्ति से विमुख हो जाने की आशंका है। इसलिए भय त्याग करना ही उचित है।"