Hindi Essays, English Essays, Hindi Articles, Hindi Jokes, Hindi News, Hindi Nibandh, Hindi Letter Writing, Hindi Quotes, Hindi Biographies

Hindi Essay on "Sada Jeevan Ucch Vichar", "सादा जीवन उच्च विचार " for Students Complete Hindi Speech,Paragraph for class 5, 6, 7, 8, 9, and 10.

सादा जीवन उच्च विचार 

Sada Jeevan Ucch Vichar

अपने अच्छे आचार-विचार में मनुष्य को धन, यश, आच सय प्राप्त होत हैं। भारतीय संस्कृति में सदा सदाचार की महिमा का गुणगान किया गया। सदाचार शब्द सत् - आचार - इन दो शब्दों के मेल से बना है। सदाचार का अर्थ है- अच्छा आचरण आचरण व्यक्ति तथा मान दान।

व्यक्ति सामाजिक जीव है। उसका हरेक कार्य बहुजन हिताय होना चाहिए। प्रत्येक समाज के अपने नियम होते हैं। उन्हीं के अनुरूप किया गया व्यवहार सदाचार कहलाता है। इसका मानवीय जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। सदाचार में अनेक गुणों का समावेश होता है। सदाचार से समाज की व्यवस्था बनी रहती है। समस्त समाज को सुखमय बनाने हेतु सदाचार का पालन अत्यंत आवश्यक है।

सदाचार सामाजिक प्रतिष्ठा, उपलब्धियों की आधारशिला है। सत्यभाषण, उदारता, विनम्रता, मधुरवाणी, सहानुभूति, दया, अनुशासन आदि सदाचार के प्रमुख गुण हैं। सदाचार से न केवल व्यक्ति के चरित्र में ही अनेक गुण आते हैं अपितु उसकी आत्मा भी अलौकिकता से दीप्तिमान हो उठती है। सदाचारी व्यक्ति स्वस्थ तन, परिष्कृत बदधि और मन का अधिकारी होता है।

सदाचारी व्यक्तियों के विचार शुद्ध और संकल्प दृढ़ होते हैं। वे संसार में सुख-शांति का प्रसार करते हैं। सदाचार निरंतर सुख व शांति को जन्म देता है। सदाचारी व्यक्ति प्रत्येक कार्य मानव हितार्थ कर न केवल प्रतिष्ठा का अधिकारी बनता है वरन उसका अनुसरण कर अन्य व्यक्ति भी सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते हैं। किसी भी समाज में सदगुणों का प्रचार-प्रसार करने में इन लोगों की विशिष्ट भूमिका होती है।

सदाचारी व्यक्तियों का आचरण समाज में उज्ज्वल उदाहरण बन जाता है। लोग उनके कार्यों के उदाहरण देते हैं। सदाचार से व्यक्ति के व्यक्तित्व का उज्वल पक्ष निखरकर सामने आता है। सदाचारी व्यक्तियों की कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और संयम समाज में आदर्श स्थापित करते हैं। महाराणा प्रताप, शिवाजी, लक्ष्मीबाई, स्वामी दयानंद सरस्वती, राजा राम मोहन राय, मदनमोहन मालवीय, महात्मा गांधी जैसे सहस्रों महापुरुष अपने अलौकिक सदाचार तथा विशिष्ट गुणों के कारण ही अमर हो गए।

प्रत्येक समाज के सदाचार के नियम अलग-अलग होते हैं, परंतु बड़ों का आदर, अच्छा व्यवहार, जन हितार्थ कार्य करना, अनुशासन का पालन करना आदि बातें हर समाज में अच्छी मानी जाती है। गोष्ठी, सभा, उत्सवों में हर देश के अपने-अपने रीति रिवाज होते हैं। मुसकराकर उन देना, अतिथि का सत्कार करना, किसी की बात या निजी जीवन में हस्तक्षेत्र न करना, किसी की चीजों को न छना आदि बातें संसारभर के लोगों में सदाचार में शामिल की जाती हैं।

सदाचार के पालन से ही व्यक्ति व समाज दोनों उन्नति करते हैं। समाज की व्यवस्था बनाए रखने में सदाचार का बहुत योगदान है। यदि विद्यालय में सदाचार का पालन किया जाएगा तो सब तरफ सुव्यवस्था रहेगी, अध्यापक सही प्रकार से शिक्षण कर पाएंगे, विद्यार्थियों का आपस। में प्रेम व सौहार्द बना रहेगा। यदि सदाचार का पालन न किया जाए तो। कक्षा में अव्यवस्था रहने से न तो पढाई हो पाएगी, न सफाई रहेगी और। न ही अन्य गतिविधियाँ हो पाएंगी। इसी प्रकार घर तथा समाज में भी । युग, हर काल में सदाचार की आवश्यकता रही है। 

सदाचार की व्यक्तिगत जीवन में भी बहुत उपयोगिता है। सदाचारी व्यक्ति नियमों का पालन करता है, सबसे मधुर आचरण करता है। अतेव उसके कार्य निर्बाध गति से होते रहते हैं। सदाचारी व्यक्ति के घर का। समस्त वातावरण ही शिष्ट बन जाता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति कट। वचन बोलता है, नियमों का पालन नहीं करता, उसके पग-पग पर संकट उत्पन्न होते रहते हैं। हम जैसा व्यवहार दसरों से करते हैं. दसरे भी हमसे वैसा ही व्यवहार करते हैं। सदाचारी व्यक्ति सदा दूसरों से प्रेम व सम्मान पाता है। इससे उसका हृदय सदा प्रफुल्लित रहता है। वह अपने सब काय । मन लगाकर करता है तथा जहाँ भी कदम रखता है, सफलता उसके कदम चूमती है।

सदाचारी व्यक्ति शांत, शीतल, मंद बयार की भाँति सखदायी होता है। सदाचार से न केवल दूसरों का हित होता है अपित स्वयं के जीवन में भी सुख-शांति रहती है। कारण, सदाचारी व्यक्ति ईर्ष्या-द्वेष जैसी दुर्भावनाओं से सदा दूर रहता है। अहित चाहने वाला दूसरों के साथ स्वयं को भी कष्ट पहुँचाता है।

सदाचारी व्यक्ति समाज का उद्धार करने वाले नियमों को अपनाता है। उसका न केवल बाहरी आचरण अपितु मन भी शुद्ध होता है। यह सदा अपने विचारों को सुसंस्कृत बनाने की दिशा में प्रयत्नशील रहता है। उसे अपनी वाणी व भावनाओं पर नियंत्रण रहता है।

सदाचार से व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है। सदाचारी व्यक्ति पीड़ाग्रस्त विश्व को मुसकान दे सकता है। सदाचार व्यक्ति के बाहय दोषों को छिपा देता है। कुरूप व्यक्ति भी अपने आचार-विचार से सबको मोहित कर लेता है। इसीलिए शेक्सपियर ने कहा था- तुम्हें जो चाहिए, उसे अपनी मुसकान से प्राप्त करो, न कि तलवार के ज़ोर से।

सदाचार वह मार्ग है जो व्यक्ति को सम्मान, प्रतिष्ठा तथा सफलता तक पहुँचाता है। इस मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति स्वयं तथा समाज का हित कर अपना जीवन सफल बनाता है। परिवर्तनशील समाज में उन्नति का अधिकारी सदाचारी ही बनता है। अतएव, मानव जीवन में सदाचार का विशेष महत्त्व है।




Post a Comment

0 Comments