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Hindi Essay on "Dev Dev Aalsi Pukara", "दैव दैव आलसी पुकारा " for Students, Complete Hindi Essay, Paragraph, Speech for class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 12 Exam.

दैव दैव आलसी पुकारा 
Dev Dev Aalsi Pukara

अर्थ-आलसी ही दैव या भाग्य का सहारा माँगते हैं-निकम्मे लोग आलस्य करते हैं-आलसी भाग्यवाद का सहारा लेते हैं-वे मान बैठते हैं कि मनुष्य को भाग्य से मिलता है कर्म से नहीं यह गलत धारणा उन्हें कर्म से रोकती है-बड़े कुलीन लोगों के उदाहरण-राजा, सेठ या बड़े लोगों के वंशज भाग्य से सुखी होते हैं, कर्म करने से नहीं-ऐसे लोग कठिन परिश्रम नहीं करते-वे कर्म की शक्ति विवेचन और निकम्मेपन में लगा देते हैं-आलस्य से उबरते ही परिश्रम, कर्म और सौभाग्य की शुरुआत हो जाती है।



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