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Hindi Essay on "Doordarshan T V", "दूरदर्शन टी वी " for Students Complete Hindi Speech, Paragraph for class 5, 6, 7, 8, 9, and 10 students in Hindi Language

दूरदर्शन टी वी 
Doordarshan T V


दूरदर्शन आधुनिक युग का महत्त्वपूर्ण आविष्कार है। यह एक ऐसा यन्त्र है जिसकी सहायता से व्यक्ति दूर की वस्तु एवं व्यक्ति को देख और सुन सकता है। इस यन्त्र की सहायता से कानों तथा आँखों दोनों की तृप्ति होती है। दूरदर्शन का आविष्कार सन् 1926 ई. में इंग्लैंड के जॉन एल. बेयर्ड ने किया था। दूरदर्शन मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा देने, जानकारी बढ़ाने, प्रसार और प्रचार का भी महत्त्वपूर्ण तथा सशक्त साधन है।


आरम्भ में दूरदर्शन काफी महँगा पड़ता था, इसीलिए यह प्रत्येक व्यक्ति को तो क्या प्रत्येक देश तक में सुलभ नहीं था। धीरे-धीरे इसका प्रचलन और प्रसारण इस सीमा तक बढ़ा कि आज यह सर्वत्र देखा और सुना जा सकता है। अब यह राजभवन से लेकर झोपड़ी तक में पहुँच चुका है। पहले यह श्वेत-श्याम स्वरूप में ही प्राप्त था परन्तु अब तो रंगीन दूरदर्शन, सारे विश्व में उपलब्ध है। इसके द्वारा हम देश-विदेश में होने वाले खेलों को घर बैठकर देख सकते हैं और उनका भरपूर आनन्द उठा सकते हैं। इसके अतिरिक्त देश-विदेश में घटित घटनाओं को हम सीधे अपनी आँखों से देख सकते हैं। आजकल इसके माध्यम से कक्षा में पाठ भी पढ़ाया जाता है जिसे बच्चे भली प्रकार समझ लेते हैं।


आजकल दूरदर्शन को भू-उपग्रह से जोड़ दिया गया है ताकि ग्रामवासी भी इसका भरपूर लाभ उठा सकें। आज के व्यस्त जीवन में यह मनोविनोद का बढ़िया और सस्ता साधन है। इसके द्वारा नाटक, हास्य-व्यंग्य, संगीत, कवि सम्मेलन, चलचित्र तथा अनेक प्रकार के सीरियल देखकर हम अपना मनोरंजन कर सकते हैं। इसके माध्यम से कृषि सम्बन्धी कार्यक्रम दिखा कर कृषि कार्यों की अधिकाधिक जानकारी दी जा रही है। इस तरह यह कृषि के विकास में किसानों की सहायता कर रहा है। विज्ञापनों को देकर व्यापारी वर्ग व विभिन्न वस्तुओं के निर्माता अपनी सहायता कर रहा है। सुदूर ग्रहों की जानकारी इसके कैमरे सरलता से प्राप्त कर लेते हैं। विज्ञान के नित्य नए-नए आविष्कारों ने इसे अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया है। केबल टी.वी., स्टार टी.वी., वी.सी.आर., कम्प्यूटर खेल आदि ने इसे नया रूप दे दिया है।


दूरदर्शन में कुछ कमियाँ भी दृष्टिगत होती हैं। इसके प्रकाश से तथा इसे अनवरत देखने से आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, यहाँ तक कि आँखें खराब भी हो जाती हैं। इसके द्वारा कुछ ऐसे कार्यक्रम देखने को मिलते हैं जिनका बच्चों के मानस पटल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित (कुंठित) होती है।



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