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Hindi Essay on "Swadesh Prem", "स्वदेश प्रेम" for Students Complete Hindi Speech, Paragraph for class 5, 6, 7, 8, 9, and 10 students in Hindi Language

स्वदेश प्रेम
Swadesh Prem


प्रेम मानव का स्वाभाविक गुण है। प्रेम के अभाव में जीवन सारहीन है। यह प्रेम पारिवारिक-प्रेम, जाति-प्रेम, मित्र के प्रति प्रेम, स्वदेश-प्रेम आदि अनेक रूपों में प्रकट होता है। परंतु इनमें स्वदेश-प्रेम ही सर्वोच्च प्रेम है। जब पशु-पक्षियों को अपने घर से, अपनी मातृभूमि से प्यार होता है, तो भला मानव को अपनी जन्मभूमि और अपने देश से प्रेम क्यों नहीं होगा। मनुष्य तो विधाता की सर्वोत्तम रचना है। संस्कृत के किसी महान कवि ने ठीक ही कहा है "जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी।" अर्थात् माता और जन्मभूमि की तुलना में स्वर्ग का सुख भी तुच्छ प्रत्येक देशवासी को अपने देश से अनुपम प्रेम होता है। अपना देश चाहे बर्फ से ढका हो. चाहे गर्म रेत से भरा हो. चाहे ऊँची-ऊँची पहाडियों से घिरा हो, वह सबके लिए प्रिय होता है। वास्तव में अपनी टूटी-फूटी झोंपड़ी में हमें जो सुख मिलता है, वह पराए महलों में भी नहीं मिल सकता। अपनी मातृभूमि के हजारों संकट भी परदेस के सुखों से श्रेयस्कर हैं। देश-प्रेम का अर्थ है-देश में रहने वाले जड़-चेतन सभी प्राणियों से प्रेम है। वास्तव में, सच्चे देश-प्रेमी के लिए देश का कण-कण पावन और पूज्य होता है।


सच्चा देशप्रेमी वही होता है, जो देश के लिए नि:स्वार्थ भावना से बड़े से बड़ा त्याग कर सकता है। सच्च देशभक्त कर्तव्य की भावना से प्रेरित होता है। वह अपने प्राण हथेली पर रखकर देश की रक्षा के लिए शत्रुओं का मुकाबला करता है। ध्यान रहे, सभी को अपना कार्य करते हुए देशहित को सर्वोपरि समझना चाहिए।


जिस देश में हमने जन्म लिया है, उस देश के प्रति हमारे अनंत कर्तव्य हैं। हमें अपने प्रिय देश के लिए कर्तव्य-पालन और त्याग की भावना रखनी चाहिए। हमारे देश में अनन्य देशभक्त हुए हैं, जिन्होंने हँसते-हँसते देश पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। हमें भी उनके जैसा ही देशभक्त होना चाहिए। भगतसिंह, चन्द्रशेखर, सुखदेव आदि देशभक्तों ने अपने देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे को चूम लिया। नेताजी सभाषचन्द्र बोस, लाला लाजपत राय आदि अनेक देशभक्तों ने अनेकों कष्ठ सहकर और अपने प्राणों का बलिदान करके देश को आजाद करने में अपना योगदान दिया। राजेन्द्र प्रसाद, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू आदि देश-रत्नों ने जीवन भर देश की सेवा की।


स्वदेश-प्रेम मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। अतः हमें स्वदेश-प्रेम की भावना के साथ-साथ समग्र मानवता के कल्याण को भी ध्यान में रखना होगा। तभी हमारा जीवन सफल होगा।



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