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Hindi Essay on "Doorbhash-Telephone", "दूरभाष -टेलीफोन " for Students Complete Hindi Speech, Paragraph.

दूरभाष -टेलीफोन 

Doorbhash-Telephone


टिग घंटी बजते ही हम दौड़ पड़ते हैं। यह है, टेलीफोन की घंटी। शायद, हमारा दोस्त हमसे बात करना चाहता है।


सबसे पहले ऐसी घंटी 2 जून 1876 को कनाडा में बजी थी। वहाँ बैंट फोर्ड में ग्राहम बेल के दते थे। ग्राहम बैल ने ध्वनि के नियम को जाना। अपने इंजीनियर दोस्त से वे तरह-तरह की मशीनं बाते। एक दिन उनकी मेहनत सफल हुई। आज हम कहीं से भी, किसी भी व्यक्ति से फोन पर बात र सकते हैं। कितनी अद्भुत भेंट थी, यह संसार को! संसार सदा ग्राहम बेल का आभारी रहेगा। 2 गस्त 1922 को इस महान व्यक्ति का स्वर्गवास हो गया।





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