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Hindi Essay on "Mein Pooja Karta Hu Jinki","मैं पूजा करता हूँ जिसकी " for Students Complete Hindi Speech, Paragraph for class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 12 Examination.

मैं पूजा करता हूँ जिसकी 

Mein Pooja Karta Hu Jinki


भगवद्पूजन हर एक व्यक्ति की निजी रुचि और पैदाइश पर निर्भर है । विभिन्न धर्म भगवत्पूजन के विभिन्न तरीके निर्धारित कर चुके हैं । हिन्दु धर्म में बहुत से देव देवताओं की पूजा करते हैं। कुछ लोगों का विश्वास है कि हरएक कार्य के लिए एक देवता जिम्मेदार है, जैसे सृष्टि, रक्षा और नाश आदि कार्य के लिए क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और शिव सचमुच ये सब एक ही शक्ति के विभिन्न पक्ष हैं। लेकिन आदतन कुछ लोग किसी देवता पर विश्वास करते तो और कुछ लोग और किसी देवता पर विश्वास करते हैं । जहां तक मेरा सवाल है, मेरा विश्वास है जिस किसी भी नाम से उस ईश्वर को पुकारें, जिस किसी भी ढंग से उसकी पूजा पाठ करें, हम उस ईश्वर की अच्छाई और उस ईश्वर के मानव कल्याणकारी कार्य करने की शक्ति पर विश्वास करते हैं। मेरा विश्वास है - उस ईश्वर को ईश्वर माने जिसमें प्रतिशोध की भावना न हो। अगर कोई बन्चा ऊधम मचाता है तो कुछ लोग उस बच्चे को मारने पीटने की धमकी देते हैं। मेरे ख्याल में ऐसी धमकी देना अच्छा नहीं, ईश्वर दयाल है, करुणा निधान है । वह किसी को दण्ड देने की बात नहीं सोचता।


मेरे ख्याल में ईश्वर वही है जो, सच्चे हृदय से अपने किये कराये पर पछतावा करनेवाले भक्त की गलतियों को भूलकर, उसको क्षमा कर दें। ईश्वर में होनेवाला सद्गुण, उसकी क्षमाशीलता के सिवा और कुछ नहीं हो सकता । ईश्वर से अपनी भलाई के लिए प्रार्थना करने के बजाय, दूसरों की भलाई के लिए प्रार्थना करना, दूसरों की शांति के लिए औरों की भलाई के लिए प्रार्थना करना श्रेयकर समझता हूँ। क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि ईश्वर मुझे वही देंगे जो मेरे हित के लिए हो या जिसके लिए मैं योग्य समजा जाऊँ। ईश्वर की करतूत ऐसी विचित्र की होती हैं. जिनकी हम आलोचना नहीं कर सकते । अपने भक्तो के उद्धार के लिए कोई न कोई मार्ग ढूंढ निकालेंगे । और कभी कभी असीम आचन्द देने के लिए पहले बहुत कष्ट सहने भी देते हैं ताकि उन भक्तो और उनकी आत्माओं को पवित्र कर दे।



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