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Hindi Essay on "Sare Jahan Se Accha Hindustan", "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान" Hindi Nibandh, Paragraph for Class 7, 8, 9, 10, and 12 Students Exam.

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान
Sare Jahan Se Accha Hindustan


इस भूमंडल पर सैकड़ों देश हैं। एक से बढ़ कर एक। छोटे-बड़े, गर्म-ठंडे, धनी-निर्धन, अनेक प्रकार के देश। पर, सारे भूमंडल में शेर-सा सिर उठाए, अंगद के पाँव-सा अटल, सूरज-सा प्रखर, चाँद-सा उजला बस एक ही देश है। मेरा देश - भारत देश। तभी तो इकबाल ने कहा है - 'सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा।' तीन-तीन सागर रात-दिन इसके चरण पखारते हैं। अथाह सागर की लहरें एक पर एक आकर इसके तटों पर सिर पटकती हैं, पर इसकी थाह नहीं पातीं। निराश लौट जाती हैं। प्रकृति ने इसे अपनी प्रियतम पहचान दी है। बर्फीला हिमालय इसे भव्य रूप देता है, सुंदरतम बनाता है। कश्मीर से उत्तर-पूर्व प्रांतों तक फैला हिमालय सदा धवल, सदा शीतल, ऐसा है इसका मुकुट। गंगा-यमुना इसके गले का हार हैं। सतलुज, नर्मदा, ताप्ती, महानदी, कृष्णा, कावेरी इसकी धमनियाँ हैं- इसका जीवन हैं। विंध्य-सतपुड़ा इसके कमरबंद हैं। अरावली श्रृंखला इसकी धूसर अलकें हैं। ऐसा सुंदर-सलोना मोहक है इसका रूप। तभी तो देवता भी मेरे देश में जन्म लेना चाहते हैं।


मेरे देश की धरती सतरंगी है। कहीं हरे-भरे खेत, तो कहीं सरसों; कहीं सूरजमुखी का पीलापन, तो कहीं टेसू की लालिमा और कहीं गेहूँ-धान के रंग बदलते खेत; केरल के ताड़, नारियल, काजू, कहवा के बगीचे सतपुड़ा के घने वन; कश्मीर की केसर की क्यारियाँ; असम के चाय के बाग - सब मिलाकर मेरे देश के सौंदर्य को हजार गुना कर देते हैं। मेरे देशवासियों की वेशभूषा देखिए-रंगीले राजस्थान की ओढ़नी, गुजराती पाग, पंजाबी सलवार-कुरता, हरियाणा की घाघरी, बनारसी साड़ियाँ, कश्मीरी फिरन हर प्रांत का कोई न कोई विशेष पहनावा। इतना सुंदर, इतना मोहक कि विदेशी पर्यटक देखते ही रह जाते हैं। तीज-त्योहार हों या मेले-उत्सव हों, मेरे देशवासियों के कंठों से लोकगीतों की लहरें फूटकर सारे वायुमंडल को गुंजा देती हैं। नाचते पैरों की थिरकन तो बस देखते ही बनती है। साथ में इतने विविध वाद्य कि बस पूछिए मत ! विशेषताएँ तो और भी हैं मेरे देश में इतने बड़े देश के सौंदर्य को भला शब्दों में कैसे बाँधा जा सकता है। अनेक कवियों ने, लेखकों ने इसकी प्रशंसा में बहुत कुछ लिखा है, पर इसके सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन कोई नहीं कर सका। नित बदलते रूप का संपूर्ण वर्णन भला कैसे हो सकता है! हर भोर इस देश में नया रंग भरती है, हर शाम इसे नया रूप देती है। हम तो बस इतना ही कह सकते हैं - सबसे सुंदर, सबसे प्यारा, देश हमारा।





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