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600 Words Hindi Essay on "Mere Sapno Ka Bharat", "मेरे सपनों का भारत " for Kids and Students.

मेरे सपनों का भारत 
Mere Sapno Ka Bharat



600 Words

भारत हमारी मातृभूमि है। जननी ओर जन्मभूमि के बारे में कहा गया है कि यह स्वर्ग से बढ़कर होती है। जब तक हम जीवित रहते है जन्मभूमि के उत्थान एवं विकास की बाते सोचते रहते है। जो ऐसा नही सोचते वे देशभक्त कहलाने के योग्य नहीं है। उनके लिए मातृभूमि भूमि मात्र होती है, कोई तीर्थ या आनंददायी स्थान नहीं। क्या वे अपने राष्ट्र की उन्नति का सपना देख सकते हैं? 

भारत एक महान राष्ट्र है, आज हमारी स्थिति विश्व में अच्छी कही जा सकती है। आज का भारत अशिक्षा, बेकारी, निर्धनता आदि के दुश्चक्र से काफी आगे निकल कर आ गया है परंतु भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा, अंधानुकरण जैसे कई रोग अब भी राष्ट्र को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।

देश में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो अपने ही लोगों का शोषण करने में विश्वास रखते है। ऐसे लोग अपने कार्यो से राष्ट्र को अवनति की ओर धकेल रहे है। 

आज चारों ओर अराजकता दिखाई दे रही है फिर भी हम दुनिया के विशालतम लोकतंत्र का नागरिक होने का दंभ भर रहे हैं। मेरे सपनो का भारत कछ ऐसा है कि जिसके लक्ष्ण आज कहीं भी दिखाई नहीं दे रहे हैं।

भारत मेरा सपना है, मेरा तीर्थ है, मेरी मंजिल है। मैं ऐसे भारत की कल्पना करता हूँ जिसके निवासियों में आपसी सौहार्द की भावना हो। कहीं भी चोरी-डाका न पडें , ट्रेने न लूटी जाँए , भाई-भाई की हत्या ना करे। धर्म और जाति के बड़प्पन के आधार पर दंगे -फसाद न हों, किसी अबला नारी की इज्जत न लूटी जाए। 

भारत के नागरिक सिगरेट, बीड़ी, शराब , गाँजा, अफीम आदि नशे से दूर रहें तथा अधिकांश नागरिकों का स्वास्थ्य अच्छा हो। हमारा कोई भाई उग्रवादी अथवा आतंकवादी न बने, सभी परिश्रम करके खाना सीखे।

मेरे सपनो का भारत एक खुशहाल भारत हैं। यहाँ के किसानों, मजदूरो, रिक्शा चालकों, लोहारो, बढहियो, शिक्षको, इंजीनियरों आदि सभी को समान दृष्टि से देखा जायेगा। कार्य के आधार पर किसी को छोटा या बड़ा न समझा जायेगा। 

किसी की झोपड़ी को तोड़कर उस पर महल बनाने का साहस कोई न कर सकेगा। सभी शिक्षित हों सबके हाथों में काम हो, सबके वस्त्र साफ-सुथरे हों किसी के घर के सामने कूड़े का ढेर न हो। 

ये सब कार्य भले ही छोटे हों परंतु ऐसे ही कार्यों से राष्ट्र की पहचान होती है। भारत इक्कीसवीं सदी में पहुँच गया है परंतु अधिकांश नागरिकों के घर में शौचालय तक नहीं है। सरकार ने इसके लिए कदम उठाये है। लोगो को विज्ञापनो के द्वारा प्रेरित किया है। 

कुछ लोग बहुत सुखी-संपन्न हैं तो कुछ लोग इतने दरिद्र कि भ्रम हो जाय कि यह आदमी भी है या नहीं। हमारे समाज के अनेक व्यक्तियों का रहन-सहन आज भी पशुतुल्य ही है। सिर से पाँव तक गंदा, हाथों में लाठी और भीख का कटोरा, शरीर में इतनी शक्ति नहीं कि मक्खियों को भगा सके। क्या ऐसे नागरिको के होते हुए भारत कभी महान राष्ट्र बन सकता है! 

मेरे सपनो का भारत कुछ-कुछ ऐसा है जिसका सपना कभी गाँधी और नेहरू जैसे नेताओं ने देखा था। एक ऐसे महान भारत का ऐसे लोगों ने विश्व का अग्रदूत बना दिया था। आज हम भारतवासी इनके आदर्शो को भूलकर पश्चिमी संस्कृति की विकृतियों की नकल कर रहें है। मेरे सपनों के भारत में सभी नागरिक चारित्रवान् होंगे, वे ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगें जिससे राष्ट्र का मस्तक नीचा हो। 

मेरे सपनों का भारत विज्ञान और तकनीक की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक उन्नत होगा। यहाँ के लोग सभी धर्मो को समान रूप से आदर देंगे, कोई किसी की उन्नति में रूकावट नहीं डालेगा। 

भारत का वातावरण प्रदूषण से मुक्त होगा। यहाँ की सभी नारियाँ शिक्षित होंगी। लड़को के जन्म पर तो खुशी परंतु लड़की के जन्म पर दुःख मनाने का विभेदपूर्ण सिलसिला समाप्त होगा। 

हमारी जनसंख्या अपेक्षाकृत छोटी होगी ताकि सभी लोग सुख से रह सके। कुल मिलाकर भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जिस पर हम सभी गर्व कर सकें।


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