बिसारिये न हरि नाम
एक बार संत सूफियान की महात्मा फजल से मुलाकात हुई और वे दोनों रात भर बातें करते रहे। दूसरे दिन जब सूफियान वापस जाने लगे, तो उन्होंने महात्मा फजल से कहा, “आपसे अब पता नहीं कब मुलाकात हो । वैसे कल की रात बड़ी अच्छी रही।" "कल की रात अच्छी नहीं, बुरी रही,” फजल बोले, “आपने कुछ गलत समझ लिया।” "क्या कह रहे हैं, आप? कल की रात बुरी रही?" सूफियान ने आश्चर्य से कहा ।
“हाँ, मैं सही कह रहा हूँ," फजल ने कहा, "दरअसल आप सवाल करके अपने दिल की शुबहा को मिटा रहे थे और मैं इस कोशिश में लगा रहा कि आपके सवालों का अच्छा से अच्छा जवाब दूँ। फल यह हुआ कि खुदा की आपको जरा भी याद नहीं रही और मैं भी उसे भूल गया। रात हमारी अच्छी तब कटती, जब हम सवाल-जवाब के बजाय अलग-अलग उसे याद करते।”










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